Sunday, September 27, 2015

शैलेन्द्र शर्मा का नवगीत

शैलेन्द्र शर्मा जी के गीत 'रमधनिया की जोरू धनिया 'पर बहस में रमाकांत यादव जी द्वारा जो प्रश्न उठाये गए हैं उन पर बहस में भाग लेने वाले टिप्पणीकारों ने एक का भी समुचित उत्तर नहीं दिया है बल्कि गीत में प्रयुक्त 'आया ट्विस्ट कहानी में' को चरितार्थ करते हुए गीत की अनुकूल व्याख्या की जा रही है। कोई भी रचनाकार अपने समय से निरपेक्ष नहीं रह सकता एवं परिस्थितियों के संघात से चेतना में हुए परिवर्तन के अनुसार उसकी मानसिकता ,मंतव्य और प्रतिबद्धता निर्मित होती है। रचनाकार के लेखन में उसी चेतन -अवचेतन मानसिकता की अभिव्यक्ति होती है। भारतीय समाज व्यवस्था पतनोन्मुख सामन्ती और विकासशील पूंजीवादी मूल्यों के दौर से गुजर रही है। जिसमें वर्ग और वर्ण के मूल्य समाज के हर व्यक्ति की सामाजिक स्थिति के अनुसार चेतना पर हावी रहते हैं। प्रगतिगामी सोच वाला मनुष्य अपने अध्ययन ,सामाजिक संपर्क और स्वविवेक से अपने मंतव्यों और मानसिकता को बदलने में सफल हो जाता है जिसे वर्गहीनता की श्रेणी के रूप में ग्रहण किया जाता है। एक साहित्यकार से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने लेखन में निष्पक्ष भाव से समय और समाज का विश्लेषण करते हुए अपनी समकालीनता पर प्रतिक्रिया व्यक्त करता हुआ न्याय, समता ,बंधुता के सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों की रक्षा करे।

-जगदीश पंकज
July 20 at 10:17pm

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