Wednesday, September 02, 2015

एक हाथ में हल की मुठिया

खेती किसानी में पैना, पैंड़ शब्दों का प्रयोग इधर अवध क्षेत्र में होता हो, लगता नहीं है, मुझे लगता है यह नईम, दिवाकर वर्मा या गुलाब सिंह में से किसी का हो सकता है। हालांकि इनके अधिक नवगीत पढ़ने का सुयोग नहीं मिल पाया मुझे। जब कोई नवगीत गीत के मानक पर भी खरा उतरे तो उसका क्या कहना। नवगीतों में लय गेयता और प्रवाह का निर्वाह दुष्कर है। बढ़ते शहरीकरण और जड़ों से कटने के कारण लोकसंप्रक्ति से दूरी नवगीतों में नयी कविता जैसा शब्दाडम्बर पैदा कर रही है। "'भाई भइ टनन टनन का गहना" एक अभिनव प्रयोग है, क्योकि नवगीत का मुखड़ा तो- एक हाथ में हल की मुठिया
एक हाथ में पैना
मुँह में तिक-तिक बैल भागते 
टालों का क्या कहना से ही पूरा हो जाता है। पर गहना (घंटा) का प्रयोग जहां इसे नवगीत बना देता है, वहीं "'भाई टनन टनन का गहना" की अतिरिक्त पंक्ति लोकसंप्रक्ति से लपेट देती है। पाठक को खेत जुताई का सम्पूर्ण विम्ब अद्भुत है। मेरी दृष्टि में यह मानक नवगीत है। गीत तो है ही।

-रामशंकर वर्मा
July 1 at 11:24am

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