Friday, September 25, 2015

योगेन्द्र दत्त शर्मा का नवगीत

आदरणीय यादव जी कविता गद्य तो नहीं होती कवि जिस लय को पाना चाहताहै वह है कहाँ पात्र बदलते हैं पर मूल्य ?...स्थितियां इतने समय बाद भी .....शिल्प शब्द चयन कहन अपनी टिप्पणी पर फिर से विचार करें इस तरह के गीत आजकल गिने चुने लोग ही लिख रहे हैं/ लिख सकते हैं ........
-वेद शर्मा

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