Friday, September 25, 2015

शैलेन्द्र शर्मा का नवगीत

समूचा समाज जातीय मानसिकता के घेरों में कैद है और राजनीति दलों के दलदल में फँसी हुई है.... साहित्य को समाज का दर्पण माना जाता है..... यह नवगीत समाज का एक चित्र उपस्थित कर रहा है।

-डा० जगदीश व्योम
 July 11 at 5:30pm

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