Wednesday, September 02, 2015

एक हाथ में हल की मुठिया

व्योम जी आप और कितनी धैर्य की परीक्षा लेंगे..बता ही दीजिए मुझे लगता है कि संभवत: ये रमेश रंजक जी का जनगीत हो सकता है।..मैने इसे कहीं सुना या पढा है पर याद नही

-भारतेन्दु मिश्र
July 1 at 6:30pm

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