Sunday, September 27, 2015

शैलेन्द्र शर्मा का नवगीत

मन की गाँठों का खुलना एक रचनाकार के लिए बहुत जरूरी है.... गीत और नवगीत में एक अन्तर यह भी है.... यदि गाँठें लगी हैं तो कम से कम नवगीत को नहीं समझा सकता. //
सटीक है, आदरणीय जगदीश व्योमजी. हम समझ से आगे बढ़ें. यही श्रेयस्कर है.
शुभ-शुभ

-सौरभ पाण्डेय
July 22 at 12:33pm

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