Wednesday, September 02, 2015

एक हाथ में हल की मुठिया

वाह व्योम जी, आप तो ऐसे ही श्रेष्ठ गीतों का खजाना दोस्तों को दिखाते रहें। मैंने सन 1984 में म.प्र. सरकार के कृषि विभाग द्वारा संकलित -धरती के लाल -शीर्षक गीत संग्रह में किसानी के गीतों में किसान जीवन के अनेक गीत पढे हैं, उसमे ..हे ग्राम देवता नमस्कार/सोने चांदी से नहीं किंतु /तुमने मिट्टी से किया प्यार ।..जैसी रचनाएँ भी थीं। संभवत:तभी कहीं इसे पढा है। तब मैं ललितपुर के जखौरा ब्लाक में प्रौढशिक्षा विभाग में पर्यवेक्षक था । लेकिन राघव जी की यह रचना है इस रूप में मुझे याद नहीं आता।..बहरहाल किसान चेतना का बेहतरीन गीत तो ये है ही। राघव जी के बारे में थोडा विस्तार कीजिए तो और अच्छा लगेगा।

-भारतेन्दु मिश्र
July 3 at 7:16pm

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