Saturday, August 29, 2015

डा० जगदीश व्योम

मनोज जी की इस रचना में नदी के किनारे पर वट वृक्ष बनने की आकांक्षा कवि की है वह किसी वैयक्तिक सुख के लिए नहीं बल्कि पक्षियों को आश्रय देने की चाह के लिए है ... कवि जन सामान्य की चिन्ता करता है और उनके सामान्य कष्ट दूर करने की आकांक्षा रखता है....रचना का यह कथ्य उसे नवगीत के पाले में लाकर खड़ा कर देता है.....

-डा० जगदीश व्योम
July 9 at 8:22pm

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