Saturday, August 29, 2015

भारतेन्दु मिश्र

जी राजेन्द्र जी दोनों एक कुल गोत्र के होते हुए भी एक कैसे हो सकते हैं। दोनों की धमनियों में प्रवाहित रक्त ,नाक -नक्श, आवाज-,आचरण -व्यवहार आयु -विचार आदि एक ही नहीं हो सकते।..लेकिन कुछ मित्र गीत को ही नवगीत साबित करने में हलाकान हुए जा रहे हैं और अपना कन्धा छिलवाए ले रहे हैं।..तो समझदारी से स्वीकार करना चाहिए किए दोनों आलग है।

-भारतेन्दु मिश्र
July 4 at 7:42pm

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