Saturday, August 29, 2015

डा० जगदीश व्योम

लेकिन ये चर्चा, विमर्श और बहस इतनी शास्त्रीय न हो कि सामान्य रूप से यह ऊपर ऊपर से ही निकल जाये.... सहजता के साथ सरल भाषा में इस अन्तर को नये रचनाकारों को बताना जरूरी है....

-डा० जगदीश व्योम
July 9 at 8:13pm

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